जब वो पैदा हुई तो
बाप को सिर्फ पुत्र की चाह थी
हर मोड़ पर उसकी इच्छाओ की
कुर्बानगाह थी
छेड़ा था उसे कई लड़को ने
रिश्तेदारो की भी गलत निगाह थी
हुआ प्यार था उसे किसी से
पर उस शख्स को उसकी कदर ही कहा थी
बांध दिया गया था उसे शादी की बेड़ियो में
उसकी इच्छा की किसे परवाह थी
और वो तो चाहती थी की रूह सौप दे अपने उस पति को
मगर उसकी सिर्फ बदन पे निगाह थी
होता था रोज बलात्कार उसके मन का और शरीर का भी
सारी कायनात उसकी बेबसी की गवाह थी
दे दिया पूरा जीवन बच्चो को सँभालने में
पर बुढ़ापे में उसके लिए घर में जगह की कहा थी
और मर गई एक रोज वो
वो उसकी ज़िन्दगी की सबसे अच्छी सुबह थी।
बाप को सिर्फ पुत्र की चाह थी
हर मोड़ पर उसकी इच्छाओ की
कुर्बानगाह थी
छेड़ा था उसे कई लड़को ने
रिश्तेदारो की भी गलत निगाह थी
हुआ प्यार था उसे किसी से
पर उस शख्स को उसकी कदर ही कहा थी
बांध दिया गया था उसे शादी की बेड़ियो में
उसकी इच्छा की किसे परवाह थी
और वो तो चाहती थी की रूह सौप दे अपने उस पति को
मगर उसकी सिर्फ बदन पे निगाह थी
होता था रोज बलात्कार उसके मन का और शरीर का भी
सारी कायनात उसकी बेबसी की गवाह थी
दे दिया पूरा जीवन बच्चो को सँभालने में
पर बुढ़ापे में उसके लिए घर में जगह की कहा थी
और मर गई एक रोज वो
वो उसकी ज़िन्दगी की सबसे अच्छी सुबह थी।
Omg...wat a misery...
ReplyDeleteEven a "FAKE" person can say dis kinda of words...
Intolerance