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Saturday, May 22, 2010

ZINDAGI KE NAAM

तन्हा था में तन्हा थी ज़िन्दगी
बंजर था मन दूर थी हर ख़ुशी
इस दिल के मरुस्थल में तुम आई
मेघा बन कर
मेरे आसमाँ में छा गई
मेरी ज़िन्दगी में आ गई
तेरी उन चंचल शोख अदाओ को
याद करता  हूँ  में
तू माने या न माने
सिर्फ तुझी पे मरता हूँ में
वो तेरी लटो का
तेरे चेहरे पे आना
वो तेरी आँखों का
होले होले टिमटिमाना
वो तेरी बाते
वो तेरे नखरे
झील सी आँखे और
मुझमे सिमट जाना
याद है मुझे
तेरे साथ जिया हर पल
जिसे में आज भूल सकता हूँ
ना कल.................