किसे भूल जाऊ में दोस्तों उस लड़की को जो 1st क्लास मे मेरे साथ खेलती थी फिर बचपन की गलियों में कहा गुम हो गई पता भी नही या उस लड़की को जो 5th क्लास में मेरे साथ घर तक आती थी और मेरे आस पास रहने वाले बड़े भाई बहन बोलते थे तेरी शादी इसी लड़की से करेंगे पर बड़ा होने पर में एक शादी में गया और वो वहा दुल्हन थी या उस लड़की को भूल जाऊ जो 9th क्लास में बस स्टैंड पर बस का वेट किया करती थी पर जिससे कभी बात नही हो पाई या दूर की उस रिश्तेदार को जो किसी शादी में मिली थी और मुझसे प्यार कर बैठी थी पर न जाने कहा उस बचपन में ही गुम हो गई या उस लड़की को भूल जाऊ जो मेरी दीदी से टयूसन पड़ने आती थी पर मेरे साथ घंटो खेला करती थी और कब वो बड़ी हो गई और खो गई या मेरे साथ कोचिंग में पड़ने वाली उस लड़की को भूल जाऊ जिसे लेकर मेरे दोस्त मुझे छेड़ा करते थे और जिसकी प्रोब्लेम्स सोल्व करना मुझे अच्छा लगता था और जो मुझसे देर तक फ़ोन पर बाते किया करती थी पर जिस दिन उसे पता चला में उसे propose करने वाला हूँ मुझे देख मुह फेर के चली गई क्योंकी उसे मेरी दोस्ती चाहिए थी प्यार नही या कॉलेज में पड़ने वाली उस लड़की को भूल जाऊ जो मुझे पसंद तो बहुत थी पर जिसका पहले से कोई बॉयफ्रेंड था या मेरे उस पहले प्यार को भूल जाऊ जिसके साथ कब समय गुजरता था पता ही नही चलता था और एक दिन वो भी शादी करके चली गई या उस लड़की को भूल जाऊ जो ट्रेन में मिली थी औरौर फिर कभी किसी ट्रेन में नही मिली या पड़ोस में रहने वाली उस लड़की को भूल जाऊ जो मुझे पसंद करती थी पर में तब अपनी ही लाइफ में बिजी था और उसे इंकार कर दिया या उस लड़की को भूल जाऊ जिसके लिए मेरा प्यार पाना एक शर्त जितना मात्र था या उस लड़की को भूल जाऊ जो मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी पर उसी ने पीठ पीछे धोखा दिया या उस लड़की को को भूल जाऊ जिसे मेरा प्यार चाहिए था दोस्ती नही या उस लड़की को भूल जाऊ जिसे कही देखा था और ऐसा देखा की जगह याद नही और चेहरा भुला नही तो अब तुम ही बताओ दोस्तों किस लड़की को भूल जाऊ और क्यों ?? ………
kuch yade hai,kuch baate hai mere bare me ya mere apno k bare me jo shayad koi nhi janta. me bhi nhi........ Paani mein siip jaisi, pyaasi har aatma. Buund chipi kis baadal mein Koi Jane na.........
Sunday, October 20, 2013
Sunday, August 11, 2013
वो कहते है मुझे तकलीफ क्यों है
हाँ मुझे तकलीफ है उन सब लोगो से
जो मल्टीप्लेक्स में हजारो खर्च कर सकते है
पर किसी गरीब को १० रूपये ज्यादा नही दे सकते
हाँ मुझे तकलीफ है उन लोगो से
जो मंदिरों में ढूध की नदिया बहा देंगे
पर किसी बच्चे का पेट भरने को १ वक़्त का खाना नही दे सकते
हाँ मुझे तकलीफ है युवा पीड़ी के उन बुधिजिवियो से
जो सरकार को कोस तो सकते है
पर उसका हिस्सा बन के उसे सुधार नही सकते
हाँ मुझे तकलीफ है उन सब लोगो से
जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ तो है पर उसका हिस्सा भी
जो उस ट्रैफिक पुलिस वाले को गाली तो देते है पर पकडे जाने पर 100 रुपये का नोट भी
हाँ मुझे तकलीफ है उन दहेज़ के लालचियों से
जो अपनी बेटी की शादी के समय उसके ससुराल वालो को कोसते तो है
पर जब बेटे का समय आता है तो चाहते खूब सारा दहेज़ आये
हाँ मुझे तकलीफ है उन लडको से
जो दोस्तों के बिच बैठ के सामाजिक कुरीतियों की बुराइया तो कर सकते है
पर खुद की शादी का समय आते ही चुपचाप बिक जाते है
मुझे तकलीफ है उन लडकियों से
जो लडको के छेड़ने पर उन्हें हजार गालियाँ तो दे सकती है
पर 4 -5 बॉयफ्रेंड रखना जिनके लिए गर्व की बात होती है
मुझे तकलीफ है उन धर्म के नाम पे बने संगठनो के रखवालो से
जो विदेशी संस्कर्ति को भगाना तो चाहते है
पर नारी की इज्ज़त करना नही
मुझे तकलीफ है उन माता -पिता से
जो चाहते है उनके बच्चे उनका नाम रोशन करे
पर बच्चो की परेशनिया सुनने तक के लिए जिनके पास वक़्त नही
मुझे तकलीफ है तुम लोगो से
जो ये सब पड़ेंगे, 4 -5 मिनट सोचेंगे, सामाजिक बुराइयों के बारे मे बाते करेंगे
और फिर सब भूल के अपने काम में लग जायेंगे
और मुझे तकलीफ है खुद से
जो ये सब लिख तो सकता है
पर करता कुछ भी नही। ……
जो मल्टीप्लेक्स में हजारो खर्च कर सकते है
पर किसी गरीब को १० रूपये ज्यादा नही दे सकते
हाँ मुझे तकलीफ है उन लोगो से
जो मंदिरों में ढूध की नदिया बहा देंगे
पर किसी बच्चे का पेट भरने को १ वक़्त का खाना नही दे सकते
हाँ मुझे तकलीफ है युवा पीड़ी के उन बुधिजिवियो से
जो सरकार को कोस तो सकते है
पर उसका हिस्सा बन के उसे सुधार नही सकते
हाँ मुझे तकलीफ है उन सब लोगो से
जो भ्रष्टाचार के ख़िलाफ तो है पर उसका हिस्सा भी
जो उस ट्रैफिक पुलिस वाले को गाली तो देते है पर पकडे जाने पर 100 रुपये का नोट भी
हाँ मुझे तकलीफ है उन दहेज़ के लालचियों से
जो अपनी बेटी की शादी के समय उसके ससुराल वालो को कोसते तो है
पर जब बेटे का समय आता है तो चाहते खूब सारा दहेज़ आये
हाँ मुझे तकलीफ है उन लडको से
जो दोस्तों के बिच बैठ के सामाजिक कुरीतियों की बुराइया तो कर सकते है
पर खुद की शादी का समय आते ही चुपचाप बिक जाते है
मुझे तकलीफ है उन लडकियों से
जो लडको के छेड़ने पर उन्हें हजार गालियाँ तो दे सकती है
पर 4 -5 बॉयफ्रेंड रखना जिनके लिए गर्व की बात होती है
मुझे तकलीफ है उन धर्म के नाम पे बने संगठनो के रखवालो से
जो विदेशी संस्कर्ति को भगाना तो चाहते है
पर नारी की इज्ज़त करना नही
मुझे तकलीफ है उन माता -पिता से
जो चाहते है उनके बच्चे उनका नाम रोशन करे
पर बच्चो की परेशनिया सुनने तक के लिए जिनके पास वक़्त नही
मुझे तकलीफ है तुम लोगो से
जो ये सब पड़ेंगे, 4 -5 मिनट सोचेंगे, सामाजिक बुराइयों के बारे मे बाते करेंगे
और फिर सब भूल के अपने काम में लग जायेंगे
और मुझे तकलीफ है खुद से
जो ये सब लिख तो सकता है
पर करता कुछ भी नही। ……
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