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Sunday, August 11, 2013

वो कहते है मुझे तकलीफ क्यों है

हाँ मुझे तकलीफ है उन सब लोगो से
जो मल्टीप्लेक्स में हजारो खर्च कर सकते है
 पर किसी गरीब को १० रूपये ज्यादा नही दे सकते

हाँ मुझे तकलीफ है उन लोगो से
जो मंदिरों में ढूध  की नदिया बहा  देंगे
पर किसी बच्चे का पेट भरने को १ वक़्त का खाना नही दे सकते

हाँ मुझे तकलीफ है युवा पीड़ी  के उन बुधिजिवियो से
 जो सरकार  को कोस तो सकते है
 पर उसका हिस्सा बन के उसे सुधार  नही  सकते

हाँ मुझे तकलीफ है उन सब लोगो से
जो भ्रष्टाचार  के ख़िलाफ  तो है पर उसका हिस्सा भी
जो उस ट्रैफिक पुलिस वाले को गाली तो देते है पर पकडे जाने पर 100 रुपये का नोट  भी

हाँ मुझे तकलीफ है उन दहेज़ के लालचियों से
जो अपनी बेटी की शादी के समय उसके ससुराल वालो को कोसते तो है
 पर जब बेटे का समय आता है तो चाहते  खूब सारा  दहेज़ आये

हाँ मुझे तकलीफ है उन लडको से
जो दोस्तों के बिच बैठ के सामाजिक कुरीतियों की बुराइया तो कर सकते है
पर खुद की शादी का समय आते ही चुपचाप बिक जाते है

मुझे तकलीफ है उन लडकियों से
जो लडको के छेड़ने पर उन्हें हजार गालियाँ तो दे सकती है
पर 4 -5 बॉयफ्रेंड रखना जिनके लिए गर्व की बात होती है


मुझे तकलीफ है उन धर्म के नाम पे बने संगठनो के रखवालो से
जो विदेशी संस्कर्ति को भगाना तो चाहते है
पर नारी की इज्ज़त करना नही

मुझे तकलीफ है उन माता -पिता से
जो चाहते है उनके बच्चे उनका नाम रोशन करे
पर बच्चो की परेशनिया सुनने तक के लिए जिनके पास वक़्त नही

मुझे तकलीफ है तुम लोगो से
जो ये सब पड़ेंगे, 4 -5 मिनट सोचेंगे, सामाजिक बुराइयों के बारे मे बाते करेंगे
और फिर सब भूल के अपने काम में लग जायेंगे

और मुझे तकलीफ है खुद से
जो ये सब लिख तो सकता है
पर करता कुछ भी नही। ……


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