तन्हा था में तन्हा थी ज़िन्दगी
बंजर था मन दूर थी हर ख़ुशी
इस दिल के मरुस्थल में तुम आई
मेघा बन कर
मेरे आसमाँ में छा गई
मेरी ज़िन्दगी में आ गई
तेरी उन चंचल शोख अदाओ को
याद करता हूँ में
तू माने या न माने
सिर्फ तुझी पे मरता हूँ में
वो तेरी लटो का
तेरे चेहरे पे आना
वो तेरी आँखों का
होले होले टिमटिमाना
वो तेरी बाते
वो तेरे नखरे
झील सी आँखे और
मुझमे सिमट जाना
याद है मुझे
तेरे साथ जिया हर पल
जिसे में आज भूल सकता हूँ
ना कल.................
kuch yade hai,kuch baate hai mere bare me ya mere apno k bare me jo shayad koi nhi janta. me bhi nhi........ Paani mein siip jaisi, pyaasi har aatma. Buund chipi kis baadal mein Koi Jane na.........
Saturday, May 22, 2010
Friday, April 09, 2010
april aur uske fool
अप्रैल चालू हुआ और उसके साथ उसके fool भी.... महा मुर्ख दिवस... लोगो को मुर्ख बनाओ या खुद बन जाओ पर हम चाहे मुर्ख बनाये न बनाये हम हमेशा मुर्ख ही रहेंगे. पता नही जिंदगी हमे पागल बनती है या हम जिंदगी को.........बचपन में हमारी मुर्खता को बचपना कह के ताल दिया जाता था और फिर जब और बड़े हुए तो कहा जवानी में गलतिय तो होती है फिर बुदापे में लोग सठिया जाते है तो हमारी मुर्खता हमारी म्रत्यु के साथ ही हमारा पिचा छोडती है.जब हम दुसरो को पागल बना रहे होते है तो नही जानते असल में हम खुद पागल बन रहे होते है.
हम जीवन भर जब पागल बने रहते है तो फिर ये १ दिन हमारे लिए स्पेशल क्यों बनवाया है भाई ...........कभी दुसरो से आगे बड़ने की जिद...तो कभी सब कुछ पाने का खयाब...तो कभी दोस्तों से जूठ तो कभी प्यार के लिए किसी को मुर्ख बनाना.......
लोग कहते है दुसरो को मुर्ख बनाना भी एक कला है एक आर्ट है .पर ये एक ऐसी कला है जिसमे आप जो दुसरो के साथ कर रहे होते हो वो ही खुद के साथ हो रहा होता है. यानि आप बेवकूफ बनाते हो दुसरे को पर असल में खुद बन रहे होते हो..........
वैसे इन्सान को जो मज़ा दुसरो को मुर्ख बनाने में आता है वो मज़ा और किसी में कहा .लोगो को अपनी उंगलियों पे नाचना.....
पर किसी और की उंगलियों पे हम खुद नाच रहे होते है और ये हम नही जानते...वैसे मेने कही पड़ा था इन संसार में २ ही लोग खुश है १ बच्चा और दूसरा पागल..
तो आइये हम सब पागल कसम खाते है की हम सब पागल .....पागल थे .....पागल है और पागल(मुर्ख) बने रहेंगे.............
हम जीवन भर जब पागल बने रहते है तो फिर ये १ दिन हमारे लिए स्पेशल क्यों बनवाया है भाई ...........कभी दुसरो से आगे बड़ने की जिद...तो कभी सब कुछ पाने का खयाब...तो कभी दोस्तों से जूठ तो कभी प्यार के लिए किसी को मुर्ख बनाना.......
लोग कहते है दुसरो को मुर्ख बनाना भी एक कला है एक आर्ट है .पर ये एक ऐसी कला है जिसमे आप जो दुसरो के साथ कर रहे होते हो वो ही खुद के साथ हो रहा होता है. यानि आप बेवकूफ बनाते हो दुसरे को पर असल में खुद बन रहे होते हो..........
वैसे इन्सान को जो मज़ा दुसरो को मुर्ख बनाने में आता है वो मज़ा और किसी में कहा .लोगो को अपनी उंगलियों पे नाचना.....
पर किसी और की उंगलियों पे हम खुद नाच रहे होते है और ये हम नही जानते...वैसे मेने कही पड़ा था इन संसार में २ ही लोग खुश है १ बच्चा और दूसरा पागल..
तो आइये हम सब पागल कसम खाते है की हम सब पागल .....पागल थे .....पागल है और पागल(मुर्ख) बने रहेंगे.............
Wednesday, March 31, 2010
kagaj muda hua
अन्दर से में टुटा लेकिन
बहार से हूँ जुड़ा हुआ
जिसे न कोई छु पता है
में हूँ कागज मुड़ा हुआ
छोड़ गया था मुझको कोई
फिर मिलने की आस में
तड़प रहा हूँ कबसे अकेला
फिर खुलने की चाह में
दिल की बात मुझपे लिखता कोई
चाहत थी मेरी ये कब से
ख़ाली था और ख़ाली हूँ
मुड़ा हुआ में जब से
उड़ जाऊ में नील गगन में
या छुप जाऊ पुस्तक वन में
अमर सदा में हो जाऊ
जो रंग जाऊ प्रेम रंग में.............
बहार से हूँ जुड़ा हुआ
जिसे न कोई छु पता है
में हूँ कागज मुड़ा हुआ
छोड़ गया था मुझको कोई
फिर मिलने की आस में
तड़प रहा हूँ कबसे अकेला
फिर खुलने की चाह में
दिल की बात मुझपे लिखता कोई
चाहत थी मेरी ये कब से
ख़ाली था और ख़ाली हूँ
मुड़ा हुआ में जब से
उड़ जाऊ में नील गगन में
या छुप जाऊ पुस्तक वन में
अमर सदा में हो जाऊ
जो रंग जाऊ प्रेम रंग में.............
teri yaad sath hai
Main jahaan rahoon,
Main kahin bhi rahu,
Teri yad sath he ...
Kisi se kahu,
Ke nahi kahu,
Yeh jo dil
Ki bat hain.
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
Main jahaan rahoon,
Main kahin bhi hu,
Teri yad sath he
Kahin to dil me yado ki,
Ek shooli gad jati hain,
Kahin har ek tasvir bahut hi,
Dhundhali pad jati hain,
Koi nayi duniya ke naye,
Rango me khus reheta hain,
Koi sab kuch pake bhi,
Ye man hi man keheta hain.
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
Kahin to beete kal ki jade,
Dil me hi utar jati hain,
Kahin jo dhage tute to,
Malayen bikhar jati hain,
Koi dil me jagah nayi,
Baton ke liye rakhata hain,
Koi apni palako par,
Yaadon ke diye rakhata hain,
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
Main kahin bhi rahu,
Teri yad sath he ...
Kisi se kahu,
Ke nahi kahu,
Yeh jo dil
Ki bat hain.
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
Main jahaan rahoon,
Main kahin bhi hu,
Teri yad sath he
Kahin to dil me yado ki,
Ek shooli gad jati hain,
Kahin har ek tasvir bahut hi,
Dhundhali pad jati hain,
Koi nayi duniya ke naye,
Rango me khus reheta hain,
Koi sab kuch pake bhi,
Ye man hi man keheta hain.
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
Kahin to beete kal ki jade,
Dil me hi utar jati hain,
Kahin jo dhage tute to,
Malayen bikhar jati hain,
Koi dil me jagah nayi,
Baton ke liye rakhata hain,
Koi apni palako par,
Yaadon ke diye rakhata hain,
Kehne ko sath apne,
Ek duniya chalti hain,
Par chupke is dil me,
Tanahai palati hain,
Bas yad sath hain
Teri yad sath hain (3)
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